युवा डिप्रेशन के ज्यादातर शिकार नजरअंदाज ना करें डिप्रेशन के ये 10 लक्षण

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किशोरावस्था में प्रताड़ित हुए लोगों को अक्सर बाद में ज्यादा भुगतना पड़ता है.

पिछले 12 सालों से मानसिक स्वास्थ्य की वकालत पर काम कर रहे जगन्नाथ लामिछाने का कहना है, "आत्महत्या को सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे के रूप में देखने के बजाय, हमारा समाज आत्महत्या को एक आपराधिक दृष्टिकोण से देखता है जिससे लोगों के लिए आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना मुश्किल हो जाता है. इस झिझक के कारण आत्महत्या अधिक होती है."

नींद में गड़बड़

डिप्रेशन कई तरह के होते हैं, इसलिए नींद का कोई एक पैट्रन नहीं होता. कुछ लोग अवसाद के कारण रात रात भर नहीं सो पाते. इसे इंसॉम्निया कहा जाता है. तो कुछ जरूरत से ज्यादा सोने लगते हैं.

थकान

मन अच्छा तो तन चंगा. जब दिमाग ही ठीक से काम नहीं कर रहा होगा, तो वह शरीर को कैसे संभालेगा. इसलिए डिप्रेशन से गुजर रहे लोग कई बार ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं.

बुरे ख्याल

डिप्रेशन से गुजर रहे लोग अक्सर अपनी या दूसरों की जान लेने के बारे में सोचते हैं. यहां तक कि नींद में भी उन्हें बुरे ख्याल आते हैं. कई बार इन बुरे सपनों के डर से भी वे सो नहीं पाते.

गुस्सा

गुस्से और चिड़चिड़ेपन में फर्क होता है. डिप्रेशन के दौरान इंसान काफी तनाव से गुजरता है. वह सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, खुद पर भी गुस्सा हो जाता है. झगड़ने की जगह उस व्यक्ति को समझने, उससे बात करने की कोशिश करें.

चिड़चिड़ापन

किसी के चिड़चिड़ेपन का मजाक उड़ाना बहुत आसान है. औरतों को "उन दिनों" का ताना मिल जाता है, तो मर्दों को बीवी से लड़ाई का. लेकिन यह इससे कहीं ज्यादा हो सकता है.

एकाग्रता की कमी

अगर दिमाग को कंप्यूटर मान लिया जाए, तो समझिए कि डिप्रेशन में उसका प्रोसेसर ठीक से काम नहीं कर पाता. आप एक काम पर टिक नहीं पाते, छोटी छोटी बातें भूलने लगते हैं.

डर

किसी के डर को निकालने के लिए उसे तर्क समझाने लगेंगे तो कोई फायदा नहीं होगा. अवसाद से गुजर रहा व्यक्ति तर्क नहीं समझता. उसे किसी भी चीज से डर लग सकता है, अंधेरे से, बंद कमरे से, ऊंचाई से, अंजान लोगों से.

पीठ में दर्द

हमारी रीढ़ की हड्डी गर्दन से ले कर कूल्हे तक शरीर को संभालती है. ज्यादा तनाव से यह प्रभावित होती है और पीठ का दर्द शुरू होता है. कई लोगों को लगातार सर में दर्द भी रहता है जो दवाओं से भी दूर नहीं होता.

खराब हाजमा

आप सोच रहे होंगे कि भला दिमाग का हाजमे से क्या लेना देना हो सकता है? याद कीजिए बचपन में परीक्षा के डर से कैसे पेट खराब हो जाया करता था. डिप्रेस्ड इंसान हर वक्त उसी अनुभव से गुजरता है.

सेक्स में रुचि नहीं

मर्दों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन आम होता है. परेशानी की बात यह है कि यह किसी दुष्चक्र जैसा है क्योंकि अपने पार्टनर की उम्मीदों पर खरा ना उतरना भी डिप्रेशन की वजह बन सकता है.

मदद

बहुत जरूरी है कि डिप्रेस्ड इंसान की मदद की जाए. डॉक्टर के पास जाने और दवाई से हरगिज परहेज नहीं करना चाहिए. जिस तरह किसी भी शाररिक बीमारी को ठीक करने के लिए दवा और प्यार दोनों की जरूरत पड़ती है, ठीक वैसा ही मानसिक बीमारी के साथ भी होता है.

डिप्रेशन का ज्यादा खतरा किसे

इंग्लैड के रिसर्चरों के मुताबिक ऐसे युवा डिप्रेशन के ज्यादातर शिकार होते हैं जिनके साथ किशोरावस्था में अच्छा व्यवहार नहीं हुआ हो. बीएमजे पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक किशोरावस्था में प्रताड़ित हुए लोगों को अक्सर बाद में ज्यादा भुगतना पड़ता है.

इस रिसर्च में करीब 4000 लोगों से 13 साल की उम्र में एक प्रश्नपत्र भरवाया गया. पांच साल बाद उनका अवसाद के लिए टेस्ट किया गया. रिसर्चरों ने पाया कम से कम हर हफ्ते प्रताड़ित किये जाने वाले 683 लोगों में से 15 फीसदी 18 साल की उम्र में अवसाद ग्रसित थे. युवावस्था में अवसाद के कई कारण हो सकते हैं. इनमें पारिवारिक समस्याएं, किसी तरह का नुकसान, मारपीट भी शामिल हैं. रिसर्चरों ने पाया कि प्रताड़ना के खिलाफ स्कूलों में चलाए जा रहे कार्यक्रम खास कारगर नहीं हैं. उनके मुताबिक किशोरावस्था में बच्चों को इस तरह के अनुभवों से जितना ज्यादा बचाया जा सके, बेहतर है.

वे लोग जिन्हें किशोरावस्था में किसी प्रिय सामान के खो जाने, उनके बारे में झूठ फैलाए जाने, मारपीट या ब्लैकमेल जैसी घटनाओं से गुजरना पड़ता है, उनकी अवसाद का शिकार होने की ज्यादा संभावना होती है.

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