तेजी से बढ़ रही महिलाओं में अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक उठाने की इच्छा

girl with guns cgsandesh
आए दिन अन्य घाटनाओ में महिलाओ की जान जाती है

महिलाओ में तेजी से बढ़ रही है हाथियार रखने की इच्छा जो की बिलकुल गलत नहीं है क्योंकि जितनी जीती भी महिला बंदुक वा हाथियार रखना चाहती है वे अपने बचाव के लिए रखना चाहती है यह बात भारत की बिलकुल नहीं है जहान आए दिन और और के अन्य घाटनाओ में महिलाओ की जान जाती है

यह मामला है अमेरिका का..सिर्फ भारत में ही नहीं, शुद्ध विश्व में भेदभाव से कोई नहीं बचा पाया है...वही अमेरिका में भी भेदभाव को लेकर के बार आंदोलन की जा चुकी है...अमेरिका में हथियार रखने वाले लोगों में अश्वेतों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है. कनेक्टिकट स्थित नेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फाउंडेशन के मुताबिक देश में जितने लोगों के पास बंदूकें हैं, उनमें से 56 प्रतिशत श्वेत पुरुष हैं. अश्वेत पुरुषों की संख्या 9.3 प्रतिशत है जबकि अश्वेत महिलाओं की संख्या 5.4 प्रतिशत. बंदूक रखने वालों में 16 प्रतिशत श्वेत महिलाएं हैं. फाउंडेशन की पब्लिक अफेयर्स डाइरेक्टर मार्क ओलिविया के अनुसार 2020 में अश्वेतों द्वारा बंदूकें खरीदने के चलन में बड़ा बदलाव आया है.

और इसी का परिणाम है कि अब शूटिंग रेंज में अश्वेत महिलाएं दिखाई देने लगी हैं. लगभग दो दशक से निशानेबाजी कर रहीं श्वेत महिला बेथ अल्काजार कहती हैं कि शूटिंग रेज पर अश्वेत महिलाओं का होना एक दुर्लभ घटना है. अलाबामा में शूटिंग सिखाने वालीं अल्काजार कहती हैं, "सच कहूं तो, रेंज पर अश्वेत महिला की एक से ज्यादा तस्वीर मेरे जहन में नहीं उभरती. पिछले पांच साल में मेरी गतिविधि बढ़ी है और जब भी मैं रेंज पर जाती हूं, हर बार पहले से ज्यादा अश्वेत महिलाएं नजर आती हैं.”

डेट्रॉयट में शूटिंग इंस्ट्रक्टर लैवेट ऐडम्स कहती हैं कि अधिकतर अश्वेत महिलाओं के लिए बूंदक चलाना सीखना अपनी देखभाल करने से जुड़ा है. अश्वेत महिला ऐडम्स बताती हैं, "महिलाओं के खिलाफ अपराध कोई नई बात नहीं है. महिलाएं खुद की रक्षा कर रही हैं, यह नई बात है.”ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर और जॉन्स हॉपकिन्स सेंटर फॉर गन वायलेंस प्रिवेंशन ऐंड पॉलिसी के निदेशक डेनियल वेबस्टर कहते हैं कि लोग ज्यादा बंदूकें तब खरीदते हैं जब सरकार और पुलिस पर उनका भरोसा कम हो जाता है.

प्रोफेसर वेबस्टर कहते हैं, "हमने श्वेत राष्ट्रवादियों की हिंसा में ऐसी ही वृद्धि देखी है. पुलिस में भरोसे की कमी और नफरत फैलाने वाले संगठनों के कारण बहुत सारे अश्वेत लोग हथियार खरीद रहे हैं.”

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