न्यायालय ने आसाराम के अंतरिम जमानत का अनुरोध किया अस्वीकार, फर्जी दस्तावेज पेश करने का भी लगा आरोप

आसाराम

जोधपुर: जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम को रातानाडा पुलिस ने गुरुवार को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। पुलिस ने आसाराम को लेकर सीजेएम कोर्ट में पेश किया। जहां मामले की सुनवाई के बाद आसाराम को फिर से जेल भेज दिया गया है। गुरुकुल की नाबालिक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में आसाराम को 2013 से जेल भेज दिया गया है।

साल 2016 में पेश आसाराम की अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने साल 2017 में खारिज कर दिया। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी कागजात दिखाने के लिए उन पर एफ आई आर दर्ज करने और 1 लाख का जुर्माना लगाने के लिए भी आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आसाराम बापू ने जमानत लेने के लिए जो मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाए थे वह फर्जी थे। आसाराम पर यह फैसला चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिया था।

बता दें कि आसाराम ने अपने आप को अस्वस्थ बताते हुए कोर्ट से जमानत मांगी थी। केरल जाकर आयुर्वेदिक इलाज करवाने की छूट मांगी थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऐम्स को एक मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया था, जिसका काम आसाराम की सेहत की जानकारी कोर्ट को देना था। आसाराम की जांच करने वाली मेडिकल टीम ने न्यायालय ने कोर्ट को बताया कि आसाराम की हालत स्थिर है। राजस्थान सरकार ने इस मामले में जवाब पेश करते हुए बताया था कि आसाराम का जोधपुर के अस्पताल में उपचार हो रहा है, वहां उनके इलाज की सारी सुविधाएं हैं। गौरतलब है कि आसाराम को 2013 में जोधपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था वह तब से ही जेल में है। 74 साल के आसाराम ने निचली अदालत से लेकर शीर्ष अदालत तक कई बार जमानत की याचिका दी थी। उन पर 16 साल की बच्ची का शारीरिक शोषण करने का आरोप था जिसकी सुनवाई करते हुए एससी – एसटी कोर्ट ने के तत्कालीन पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा की कोर्ट ने आसाराम को जीवन की आखरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई थी।

तत्कालीन समय में शीर्ष अदालत ने उनकी नियमित जमानत की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि इस मुकदमे को अनावश्यक रूप से लंबा खींचा जा रहा है। अभियोजन के गवाहों पर भी हमले हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि 2 गवाहों के मृत्यु हो चुकी है। पीठ ने कहा हमारा मानना है कि आसाराम द्वारा किया गया नियमित जमानत न्यायोचित नहीं है। चिकित्सीय  आधारों पर अंतरिम जमानत का अनुरोध अस्वीकार करते हुए न्यायालय ने कहा कि उनकी चिकित्सकीय आधार पर अंतरिम जमानत का अनुरोध अस्वीकार कर दिया था। न्यायालय ने कहा कि उनकी चिकित्सीय स्थिति इतनी गंभीर नहीं है। जिसकी वजह से उन्हें किसी अन्य जेल या अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए।।

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