मोदी सरकार करेगी 2.5 लाख रुपये की मदद,बिना जमीन के गांव में आप भी शुरू कर सकते है ये बिजनेस

gaav

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को मोदी सरकार लगातार बढ़ावा दे रही है. देश के किसानों को 22.91 करोड़ से अधिक सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किये गए. मोबाइल किसान पोर्टल पर 5.13 करोड़ से अधिक किसान और राष्ट्रीय कृषि बाजार (eNAM) पोर्टल पर 1.71 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हैं.

आपको बता दें कि गांव में  लैब खोलना चाहता है तो वो जिले के कृषि उपनिदेशक, संयुक्त निदेशक या उनके कार्यालय में अपना प्रस्ताव दे सकता है. साथ ही agricoop.nic.in वेबसाइट और soilhealth.dac.gov.in पर भी इसके लिए संपर्क किया जा सकता है. किसान कॉल सेंटर (1800-180-1551) पर भी संपर्क कर अधिक जानकारी ली जा सकती है.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय  की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस स्कीम में 18 से 40 साल तक की उम्र वाले ग्रामीण युवा  अप्लाई कर सकते हैं.इसमें वही आवेदन कर सकता है जो एग्री क्लिनिक, कृषि उद्यमी प्रशिक्षण के साथ द्वितीय श्रेणी से विज्ञान विषय के साथ मैट्रिक पास हो.

इस योजना के तहत मिट्टी की स्थिति का आकलन नियमित रूप से राज्य सरकारों द्वारा हर 2 साल में किया जाता है, ताकि खेत में पोषक तत्वों की कमी की पहचान के साथ ही उसमें सुधार किया जा सके.मिट्टी नमूना लेने, जांच करने एवं सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा 300 प्रति नमूना प्रदान किया जा रहा है.

मिट्टी की जांच न होने की वजह से किसानों को यह पता नहीं होता कि कौन सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है. इससे खाद ज्यादा लगती है और उपज भी ठीक नहीं होती.सरकार जो पैसे देगी उसमें से 2.5 लाख रुपये जांच मशीन, रसायन व प्रयोगशाला चलाने के लिए अन्य जरूरी चीजें खरीदने पर खर्च होगी. कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, जीपीएस की खरीद पर एक लाख रुपये खर्च होंगे.

सरकार की कोशिश है कि जैसे लोग अपनी सेहत का टेस्ट करवाते हैं वैसे ही धरती की भी कराएं. इससे धरती की उर्वरा शक्ति खराब नहीं होगी. स्वायल टेस्टिंग लैब दो तरीके से शुरू हो सकती है.पहले तरीके में लैब एक दुकान किराये पर लेकर खोली जा सकती है. इसके अलावा दूसरी प्रयोगशाला ऐसी होती है जिसे इधर-उधर ले जाया जा सकता है. इसे मोबाइल स्वायल टेस्टिंग लैब कहते हैं.

देश में इस समय छोटी-बड़ी 7949 लैब हैं, जो किसानों और खेती के हिसाब से नाकाफी कहीं जा सकती हैं. सरकार ने 10,845 प्रयोगशालाएं मंजूर की हैं. राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद कहते हैं कि देश भर में 14.5 करोड़ किसान परिवार हैं.

ऐसे में इतनी कम प्रयोगशालाओं से काम नहीं चलेगा. भारत में करीब 6.5 लाख गांव हैं. ऐसे में वर्तमान संख्या को देखा जाए तो 82 गांवों पर एक लैब है.इसलिए इस समय कम से कम 2 लाख प्रयोगशालाओं की जरूरत है. कम प्रयोगशाला होने की वजह है जांच ठीक तरीके से नहीं हो पाती.

Share this story