हॉस्पिटल में हर महिला स्टाफ नर्स नहीं होती, जानिए हरी और नीली ड्रेस का मतलब

स्टाफ नर्स

बात सही है. हॉस्पिटल में हर महिला स्टाफ को नर्स समझना पूरी तरह से नासमझी और जानकारी की कमी है. अगर सभी महिला स्टाफ नर्स होती तो ड्रेस का रंग अलग-अलग क्यों रखा जाता? किसी महिला को हम हरी ड्रेस में तो किसी को नीली ड्रेस में क्यों देखते? ड्रेस अलग होती है, इसका मतलब हुआ कि काम भी अलग होता होगा. आइए आज इसके बारे में डिटेल में जानते हैं.

अस्पतालों में डॉक्टर या नर्स, आपने उन्हें सफेद एप्रन या स्क्रब्स में देखा होगा. पहले सफेद स्क्रब्स का ही प्रचलन था, लेकिन बाद में इसका रंग हरा हो गया. माना जाता है कि हॉस्पिटल में महिला स्टाफ की ड्रेस का रंग 20वीं सदी में हरा हो गया.

ऐसा इसलिए किया गया ताकि फिजिशियन, सर्जन या मरीज हरे रंग की ड्रेस के चलते महिला स्टाफ को पहचान लेंगे. यहां ध्यान रखें कि हरा स्क्रब्स महिला स्टाफ के लिए ही नहीं बल्कि डॉक्टर के लिए भी रखा गया था. हालांकि नर्स के लिए हरी ड्रेस सिर्फ उनके लिए थी जो सर्जरी से जुड़ी थीं.

हॉस्पिटल की दुनिया में हरा रंग कब और कैसे प्रचलित हुआ, इसके बारे में ठीक-ठीक वजह का पता नहीं चलता. लेकिन असली वजह यह बताई जाती है कि हरे रंग को एप्रन या स्क्रब्स के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि रंग के मामले में यह लाल से ठीक विपरीत है.

लाल जहां खतरे का संकेत है तो हरा खुशहाली और सुख का संकेत देता है. इसी आधार पर इसे ड्रेस कोड में लागू किया गया. हालांकि यह सभी नर्स के लिए नहीं था बल्कि सर्जरी के काम से जुड़ी नर्सों को ही हरी ड्रेस में देखा गया.

ड्रेस कोड को हरा इसलिए रखा गया क्योंकि डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान खून देखते रहते हैं जिसका रंग गहरा लाल होता है. डॉक्टर के दिमाग पर खून और उसके लाल रंग की छाप हमेशा बनी रहती है. इस छाप को खून की मानसिकता से दूर करने के लिए लाल रंग से ठीक विपरीत हरे रंग को चुना गया.

डॉक्टर बीच-बीच में हरा रंग देखेगा तो खून का रंग दिमाग पर लगातार असर नहीं छोड़ेगा. माना जाता है कि हरे रंग के बदले गुलाबी को भी स्क्रब या एप्रन का रंग रखा जा सकता था लेकिन लाल और गुलाबी के वेवलेंथ में बहुत ज्यादा फर्क नहीं होता. इसलिए गुलाबी को सर्जरी के एप्रन में इस्तेमाल नहीं किया गया.


जिस तरह हरा रंग ड्रेस के लिए सबसे ज्यादा उपयोग में लिया जाता है तो दूसरे नंबर पर नीला कलर है. दिमाग पर इसका भी वैसा ही असर है, जैसा हरे रंग का होता है. नीले रंग का आसमाना होता है, समुद्र का पानी होता है और इन दोनों चीजों को गहराई से जोड़ा गया है.

यानी नीले रंग को देखकर कोई उसमें आसानी से खो सकता है. दुनिया की सभी चिंताओं से दूर लोग नीले रंग में खो सकते हैं. मरीजों का ध्यान बीमारी और परेशानी से हटाने के लिए नर्स की ड्रेस का कलर नीला रखा जाता है. नीले रंग को नर्सिंग प्रोफेशन की जान माना जाता है. यह रंग स्थितरता का भी प्रतीक है. इसके अलावा नीले रंग को ट्र्स्ट, लॉयल्टी, विज्डम, कॉन्फिडेंस और इंटेलिजेंस से जोड़ कर देखा जाता है.

ब्लू एप्रन या स्क्रब इसलिए भी प्रचलन में लाया गया क्योंकि इसे धोना आसान है. अस्पताल में करने वाले स्टाफ साफ-सफाई का खास खयाल रखते हैं. इसलिए ब्लू कलर का एप्रन ज्यादा उपयुक्त माना जाता है. जिस प्रकार से ग्रीन कलर सर्जरी वाले स्टाफ के लिए होता है, वैसे ही ब्लू कलर को भी सर्जरी की श्रेणी में ही रखा गया है. सर्जरी से जुड़े डॉक्टर या नर्स इस कलर के स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं.


अस्पतालों में महिला नर्स को पिंक ड्रेस में भी देखा जाता है. पिंक ड्रेस देखभाल से जुड़ी है जो खासकर जच्चा-बच्चा के लिए प्रयोग में लाई जाती है. यह रंग उन नर्स के लिए होता है जो मेटरनिटी या बच्चों के देखभाल से जुड़ी होती हैं.

नर्स की पिंक ड्रेस जहां केयरिंग के बारे में बताती है तो हरा रंग शांति और हीलिंग के बारे में बताता है. हरे रंग को ड्रेस कोड में इसलिए भी शामिल किया गया क्योंकि एक वैज्ञानिक अध्ययन से पता चलता है कि हरे रंग पर देखने से ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है. अगर किसी का ब्लड प्रेशर ज्यादा हो तो हरा रंग उसे कंट्रोल कर सकता है.

पिंक के बारे में कहा जाता है कि यह निगेटिव इमोशन को दूर करता है. बीमार व्यक्ति इलाज के दौरन निगेटिविटी का शिकार हो सकता है, इसलिए एप्रन का एक कलर पिंक भी जानबूझ कर रखा गया ताकि मरीजों का मूड बदले. लाल की तुलना में पिंक कलर प्यार भरा असर छोड़ता है जिसकी जरूत इलाज के दौरान ज्यादा होती है.

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