सोयाबीन की कीमतों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी, अधिक भाव के कारण गिरने लगी है मांग

सोयाबीन

देश में खराब मॉनसून की बारिश और कई राज्यों में आई बाढ़ की वजह से खरीफ सीजन की तिलहनी फसलों को नुकसान हुआ है. सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक मध्य प्रदेश में बाढ़ की वजह से सोयाबीन की फसलें बर्बाद हुई हैं.

उससे पहले बारिश के इंतजार में नए पौधे सूख रहे थे. इसकी वजह से संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में सोयाबीन और उससे जुड़े उत्पादों के दाम और बढ़ेंगे. विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच दिल्ली तेल तिलहन बाजार में शुक्रवार को सोयाबीन तेल तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के भाव नुकसान के साथ बंद हुए.

बिनौला महंगा होने से मूंगफली में मांग बढ़ी गई और इसमें तेल तिलहन कीमतों में सुधार आया. बाजार सूत्रों ने कहा कि शिकागो एक्सचेंज में 1.5 प्रतिशत और मलेशिया एक्सचेंज में 1.4 प्रतिशत की गिरावट रही.

विदेशों में भाव टूटने से यहां भी सोयाबीन की मांग प्रभावित हुई. यहां ज्यादातर सोयाबीन पेराई वाले तेल संयंत्र अपने रखरखाव में लगे हैं. साथ ही ऊंचे भाव पर खरीद कमजोर रही है. इसके अलावा, सोयाबीन तेल रहित खल (डीओसी) की कमी दूर करने के लिए इसके आयात की अनुमति दिए जाने के बाद इसकी मांग तात्कालिक रूप से प्रभावित हुई है.

मजबूत हाजिर मांग को देखते हुए कारोबारियों ने ताजा सौदों की लिवाली की, जिससे वायदा कारोबार में शुक्रवार को सोयाबीन की कीमत 94 रुपये की तेजी के साथ 7,795 रुपये प्रति क्विन्टल हो गई.

एनसीडीईएक्स में सोयाबीन के सितंबर माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 94 रुपये अथवा 1.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 7,795 रुपये प्रति क्विन्टल हो गई, जिसमें 18,710 लॉट के लिए कारोबार हुआ.

बाजार सूत्रों ने कहा कि वायदा कारोबार में मांग बढ़ने के कारण सटोरियों की ताजा लिवाली से मुख्यत: सोयाबीन वायदा कीमतों में तेजी आई. पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाले 12 लाख टन आनुवंशिक रूप से संशोधित तेल रहित सोया खली (सोयामील) के आयात के नियमों में सरकार ने पिछले दिनों ढील दी गई है. उम्मीद जताई जा रही है कि दक्षिण एशियाई देशों से 100,000 टन सोयमील का पहला शिपमेंट कुछ ही दिनों के भीतर देश में पहुंच सकता है.

महाराष्ट्र सरकार सोयामील इंपोर्ट के खिलाफ है. महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दादाजी भुसे ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर किसानों के हित में सोयामील इंपोर्ट का फैसला बदलने की मांग की है. उनका कहना है कि सोयाबीन की फसल कटाई के लिए तैयार है. ऐसे में आयात से राज्य के किसानों को उनकी सोयाबीन की उपज का सही दाम नहीं मिल पाएगा.

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