Pithori Amavasya 2021:पितरों की कृपा मिलने समेत दूर होंगी दिक्‍कतें, कर लें इनमें से कोई एक उपाय

Pithori Amavasya 2021
Pithori Amavasya 2021

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्‍या को पिठौरी अमावस्‍या के नाम से जाना जाता है। कई लोग इसे कुशा ग्रहणी अमावस्या के रूप में भी जानते हैं। इस दिन दान पुण्‍य का विशेष महत्‍व होता है। इस दिन किए गए उपायों से पितर प्रसन्‍न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्‍त होती है। इसके अलावा कष्‍टों से भी छुटकारा मिलता है। अगर आप भी जीवन में सुख शांति चाहते हैं तो इस दिन कुछ खास काम करें। इस बार पिठौरी अमावस्‍या 6 सितंबर को है। 

भाद्र मास में पड़ने वाली अमावस्या को पिठौरी (Pithori amavasya) या फिर कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है. मान्यता के अनुसार पिठौरी अमावस्या के दिन महिलाएं अपनी संतान और सुहाग के लिए व्रत करतीं हैं. इस अमावस्या पर मां दुर्गा की पूजा की जाती है

इस बार पिठौरी अमावस्या पर शुभ संयोग बन रहे हैं। चूंकि यह रविवार के दिन है और  सूर्य अपनी सिंह राशी में है ऐसे में व्रत का दोगुना फल प्राप्त होगा। इस दिन देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। ये व्रत महिलाएं अपने पति एवं बच्‍चों की सलामती के लिए रखती हैं। इस व्रत को रखने से पूर्वज भी प्रसन्‍न होते हैं। 

  1. अगर किसी की कुंडली में काल सर्प दोष हो तो इसे दूर करने के लिए पिठौरी अमावस्‍या का दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद चांदी के नाग-नागिन की पूजा करें। इसके बाद उन्‍हें जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से दोष से मुक्ति मिलेगी। 
  2. अमावस्या को पितरों का दिन कहा जाता है, इसलिए इस दिन पिंड दान एवं तर्पण करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन गरीबों एवं जरूरतमंदों को भोजन कराने एवं छाता, कम्‍बल, चप्पल आदि का दान करना अच्‍छा माना जाता है। इससे पितरों की आप पर कृपा होगी।
  3. धन प्राप्ति के लिए अमावस्या की रात को 5 लाल फूल और 5 जलते हुए दीपक बहती नदी में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से धन प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर होंगी। 
  4. अगर आपके दुश्‍मन आपका बुरा करना चाहते हैं तो उनसे बचने के लिए पिठौरी अमावस्या के दिन सरसों के तेल की चपुड़ी हुई रोटी काले कुत्ते को खिलाएं। ऐसा करने से शनि देव की कृपा होगी और दुश्मन शांत होंगे। 
  5.  अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान का नाम लेते हुए आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं। ऐसा करने से आपके जीवन में आ रही परेशानियां कम होंगी। 
पूजन की विधि (pujan vidhi)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद अमावस्या (Pithori amavasya) का व्रत विशेष फलदायी होता है. मान्यता है कि इस व्रत को माताएं ही करतीं है, यानी कोई कुंवारी कन्या इस व्रत को नहीं कर सकती. इस दिन सुबह उठकर स्नान करें. स्नान करने से पहले पानी में गंगाजल छिड़क लें. इस अमावस्या पर नहाने के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें और इस व्रत का संकल्प लें. पीठ का अर्थ आटा होता है, ऐसे में इस दिन 64 देवियों की आटे से मूर्ति यानी प्रतिमा बनाने की मान्यता है. बेसन का आटा गूंथकर उससे हार, मांग टीका, चूड़ी, कान बाली और गले के हार बनाकर प्रतिमाओं पर चढ़ाएं, फिर देवियों को फूल चढ़ाएं.

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